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19 उत्तर प्रदेश भोजन | उत्तर प्रदेश रेसिपी | उत्तर प्रदेश के व्यंजन | रेसिपी

User Tarla Dalal  •  Updated : Jan 08, 2026
   

उत्तर प्रदेश का भोजन कृषि समृद्धि और क्षेत्रीय विविधता पर आधारित एक समृद्ध शाकाहारी पाक विरासत को दर्शाता है। अवध की ग्रेवी में उपयोग होने वाले सुगंधित और संतुलित मसालों से लेकर भरपूर और देसी नाश्ते तक, उत्तर प्रदेश का व्यंजन पारंपरिक तरीकों से तैयार किए गए पौष्टिक और सरल सामग्री का उत्सव है। यहाँ की खाद्य संस्कृति रोज़मर्रा के आरामदायक भोजन, त्योहारों के विशेष व्यंजन और चावल व दाल के विविध संयोजनों का सुंदर मेल प्रस्तुत करती है, जो इसे एक विशिष्ट और यादगार पाक पहचान प्रदान करती है।

  

उत्तर प्रदेश का शाकाहारी व्यंजन Vegetarian Cuisine of Uttar Pradesh

चाहे वह धीमी आँच पर पकाई गई दालें हों या देसी चावल आधारित नाश्ते, उत्तर प्रदेश का भोजन संतुलित स्वाद, स्थानीय सामग्री और शाकाहारी समृद्धि पर विशेष ज़ोर देता है, जो घरेलू रसोइयों और भोजन प्रेमियों दोनों को आकर्षित करता है। यह विविधता तरला दलाल वेबसाइट पर उपलब्ध चुनी हुई शाकाहारी रेसिपीज़ के माध्यम से अच्छी तरह प्रलेखित है, जो इस क्षेत्र की पाक विशेषताओं को दर्शाती हैं। पारंपरिक सब्ज़ियों से लेकर आरामदायक एक-पॉट भोजन तक, उत्तर प्रदेश का भोजन साधारण रोज़मर्रा के खाने और उत्सवों के विशेष व्यंजनों दोनों के लिए उपयुक्त है। इस लेख में, हम उत्तर प्रदेश की शाकाहारी पाक कला की प्रमुख श्रेणियों का परिचय देते हैं और उन प्रसिद्ध रेसिपीज़ को उजागर करते हैं जिन्हें आप घर पर बना सकते हैं।

 

उत्तर प्रदेश का नाश्ता Uttar Pradesh Breakfast  

उत्तर प्रदेश के नाश्ते अपने भरपूर, स्वादिष्ट और ऊर्जा देने वाले व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये भोजन गहराई से क्षेत्रीय परंपराओं से जुड़े होते हैं और घरों, मंदिरों तथा स्थानीय भोजनालयों में आम तौर पर परोसे जाते हैं। यहाँ के नाश्ते में गेहूं, दालें, चावल और मौसमी सब्ज़ियों का भरपूर उपयोग किया जाता है। मसालों का प्रयोग संतुलित रूप से किया जाता है ताकि स्वाद निखरे लेकिन भारी न लगे। कई नाश्ते पौष्टिक होने के साथ-साथ आरामदायक भी होते हैं, जो कृषि आधारित जीवनशैली को दर्शाते हैं। बेक किए गए अनाज से लेकर तले हुए व्यंजनों तक, नाश्तों की विविधता अत्यंत संतोषजनक है। इन्हें अक्सर चटनी, करी या सब्ज़ी के साथ परोसा जाता है। ये सभी व्यंजन उत्तर प्रदेश की सुबहों की देसी पहचान और पाक समृद्धि को दर्शाते हैं।

 

लिट्टी-चोखा

लिट्टी-चोखा एक पारंपरिक नाश्ता है, जिसकी उत्पत्ति पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में हुई। लिट्टी साबुत गेहूं के आटे से बनी गोलियां होती हैं, जिनमें भुना हुआ बेसन और मसाले भरे जाते हैं। इन्हें बेक या भूनकर कुरकुरा और सुनहरा बनाया जाता है। चोखा भुनी हुई सब्ज़ियों जैसे बैंगन, टमाटर और आलू को सरसों के तेल और मसालों के साथ मैश करके तैयार किया जाता है। इन दोनों का संयोजन धुएँदार और मिट्टी जैसी खुशबू वाला स्वाद देता है। यह व्यंजन अत्यंत पौष्टिक, पेट भरने वाला और स्वास्थ्यवर्धक नाश्ते के लिए आदर्श है।

 

मटर घुघनी

मटर घुघनी उत्तर प्रदेश का एक लोकप्रिय नाश्ता है, जो सूखे या ताजे हरे मटर से बनाया जाता है। मटर को सुगंधित मसालों के साथ धीमी आँच पर पकाया जाता है ताकि गहरा और आरामदायक स्वाद विकसित हो। यह व्यंजन हल्का मसालेदार होने के बावजूद अत्यंत संतोषजनक होता है। इसे सुबह के समय रोटी, पूरी या कभी-कभी सादे चावल के साथ परोसा जाता है। मटर घुघनी प्रोटीन से भरपूर होती है और लंबे समय तक पेट भरा रखती है। यह स्ट्रीट-स्टाइल और घर दोनों में समान रूप से पसंद की जाती है।

 

मटर की कचौरी

मटर की कचौरी उत्तर प्रदेश की एक प्रसिद्ध सर्दियों की नाश्ते की डिश है। इसमें परतदार, तली हुई कचौरियों के अंदर मसालेदार हरे मटर की स्टफिंग भरी जाती है। बाहर से ये कुरकुरी और अंदर से नरम व स्वादिष्ट होती हैं। इन्हें आमतौर पर तीखी चटनी या आलू की सब्ज़ी के साथ गरमागरम परोसा जाता है। मसालों का मिश्रण इन्हें विशिष्ट सुगंध और स्वाद देता है। मटर की कचौरी विशेष रूप से त्योहारों और वीकेंड नाश्तों में लोकप्रिय होती है।

 

 

पूरी भाजी

आलू पूरी उत्तर प्रदेश का सबसे पसंदीदा नाश्ता संयोजन है। इसमें फूली हुई, कुरकुरी पूरियों के साथ मसालेदार और खट्टे आलू की सब्ज़ी परोसी जाती है। आलू की सब्ज़ी अक्सर बिना प्याज़ के बनाई जाती है, जिससे यह हल्की और स्वादिष्ट होती है। यह व्यंजन पारिवारिक आयोजनों, त्योहारों और मंदिरों में विशेष रूप से परोसा जाता है। कुरकुरी पूरियों और नरम आलू की सब्ज़ी का मेल अत्यंत आरामदायक और पेट भरने वाला होता है। आलू पूरी हर उम्र के लोगों की पसंदीदा बनी हुई है।

 

 

अवध-शैली की शाकाहारी करी और ग्रेवी Awadhi-Style Vegetarian Curries & Gravies

अवध शैली की शाकाहारी करी और ग्रेवी अपनी समृद्ध बनावट, संतुलित मसालों और धीमी पकाने की तकनीक के लिए जानी जाती हैं। 

इसकी उत्पत्ति लखनऊ की शाही रसोइयों से हुई, जहाँ तीखेपन की बजाय नज़ाकत को प्राथमिकता दी जाती थी। इन ग्रेवीज़ में काजू, दही, दूध या खोया का उपयोग किया जाता है, जिससे ये मलाईदार और शाही बनती हैं।

 मसालों का प्रयोग सीमित मात्रा में किया जाता है ताकि सुगंध और गहराई बढ़े। दम पर पकाने और धीमी आँच पर सिमर करने की विधि से स्वाद धीरे-धीरे विकसित होता है। 

पनीर, सब्ज़ियाँ और आलू इस शैली में बेहद अच्छे लगते हैं। ये करी आमतौर पर नान, पराठे या सुगंधित चावल के साथ परोसी जाती हैं।

 

मलाई कोफ्ता

मलाई कोफ्ता एक समृद्ध और शाही अवध शैली की करी है, जो मुलायम पनीर के कोफ्तों से बनाई जाती है। कोफ्तों को हल्के मसालों के साथ तैयार कर सुनहरा होने तक तला जाता है। इसके बाद इन्हें काजू और क्रीम से बनी टमाटर आधारित ग्रेवी में पकाया जाता है। ग्रेवी की बनावट चिकनी और स्वाद हल्का मसालेदार होता है। यह व्यंजन विशेष अवसरों और त्योहारों पर बनाया जाता है। इसे नान, पराठा या जीरा चावल के साथ परोसा जाता है।

 

 

तेहरी (सब्ज़ी बिरयानी)

तेहरी एक पारंपरिक अवध शैली का चावल व्यंजन है, जिसमें सुगंधित बासमती चावल और मौसमी सब्ज़ियाँ उपयोग की जाती हैं। यह भारी बिरयानी की तुलना में हल्की होती है और इसमें कम मसालों का प्रयोग किया जाता है। सब्ज़ियाँ और चावल एक साथ पकाए जाते हैं, जिससे स्वाद अच्छी तरह घुल-मिल जाता है। हल्के मसाले इसे सौम्य सुगंध देते हैं। तेहरी आमतौर पर एक-पॉट भोजन के रूप में परोसी जाती है। इसे रायता या सादे दही के साथ खाना सबसे अच्छा लगता है।

 

 

पनीर लबाबदार

पनीर लबाबदार एक प्रसिद्ध अवध शैली की करी है, जो अपने मलाईदार और हल्के मीठे स्वाद के लिए जानी जाती है। इसमें मुलायम पनीर के टुकड़ों को टमाटर और काजू आधारित ग्रेवी में पकाया जाता है। हल्के मसाले और थोड़ा मक्खन इसकी बनावट को और निखारते हैं। ग्रेवी गाढ़ी, सुगंधित और संतुलित होती है। यह व्यंजन खास अवसरों और पारिवारिक भोजन में परोसा जाता है। इसे नान, कुलचा या खुशबूदार चावल के साथ परोसा जाता है।

 

 

दम आलू

दम आलू एक धीमी आँच पर पकाया जाने वाला आलू का व्यंजन है, जिसे पारंपरिक दम विधि से बनाया जाता है। छोटे आलुओं को हल्का तलकर मसालेदार ग्रेवी में धीमी आँच पर पकाया जाता है। इससे आलू ग्रेवी का पूरा स्वाद अपने अंदर समेट लेते हैं। यह व्यंजन बिना ज्यादा तीखापन के गहरा और समृद्ध स्वाद देता है। दम आलू त्योहारों में विशेष रूप से परोसा जाता है। इसे पूरी, रोटी या सादे चावल के साथ खाया जाता है।

 

 

सोया कोफ्ता करी

वेजिटेबल कोफ्ता करी एक उत्सव विशेष अवध शैली का व्यंजन है, जो मिश्रित सब्ज़ियों से बने कोफ्तों से तैयार किया जाता है। कोफ्तों को बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होने तक तला जाता है। इसके बाद इन्हें मलाईदार और मसालेदार ग्रेवी में डाला जाता है। इस करी की बनावट बेहद शाही और स्वाद संतुलित होता है। यह विशेष भोजन और आयोजनों के लिए आदर्श है। इसे नान, पराठा या पुलाव के साथ परोसा जाता है।

 

 

उत्तर प्रदेश सब्ज़ियाँ  Uttar Pradesh Sabzis

उत्तर प्रदेश की पारंपरिक मुख्य सब्ज़ियाँ क्षेत्र की सादगी, संतुलन और घरेलू पकाने की शैली को दर्शाती हैं। ये सब्ज़ियाँ आमतौर पर आलू, मटर, फूलगोभी और मौसमी साग-सब्ज़ियों से बनाई जाती हैं। इनमें मसालों का प्रयोग सीमित लेकिन प्रभावी होता है, जिससे सब्ज़ियों का प्राकृतिक स्वाद उभरकर आता है। कई सब्ज़ियाँ बिना प्याज़ और लहसुन के बनाई जाती हैं, जो इन्हें सात्विक और जैन भोजन के लिए उपयुक्त बनाती हैं। धीमी पकाने और तड़के की विधियाँ स्वाद और सुगंध को बढ़ाती हैं। ये सब्ज़ियाँ रोज़मर्रा के भोजन का अभिन्न हिस्सा हैं। रोटी, पूरी या चावल के साथ परोसी जाने वाली ये सब्ज़ियाँ पारंपरिक शाकाहारी भोजन की नींव हैं।

 

आलू टमाटर सब्ज़ी

आलू टमाटर सब्ज़ी उत्तर प्रदेश की सबसे प्रसिद्ध सब्ज़ियों में से एक है। इसमें नरम आलुओं को खट्टे टमाटर आधारित रस में पकाया जाता है। इसमें साधारण मसालों का प्रयोग किया जाता है, जो टमाटर की प्राकृतिक मिठास को निखारते हैं। इसकी पतली ग्रेवी इसे रोटी और चावल दोनों के लिए उपयुक्त बनाती है। यह सब्ज़ी आमतौर पर रोज़मर्रा के भोजन में बनाई जाती है। इसका आरामदायक स्वाद सभी उम्र के लोगों को पसंद आता है।

 

कद्दू की सब्ज़ी 

कद्दू की सब्ज़ी उत्तर प्रदेश की एक पारंपरिक सब्ज़ी है, जिसे कद्दू से बनाया जाता है। इसमें सब्ज़ी की प्राकृतिक मिठास बनाए रखने के लिए साधारण मसालों का उपयोग किया जाता है। इस सब्ज़ी की बनावट नरम होती है और स्वाद हल्का मीठा होता है। इसे अक्सर बिना प्याज़ और लहसुन के बनाया जाता है। यह व्यंजन आमतौर पर धार्मिक भोजन में परोसा जाता है। कद्दू की सब्ज़ी पूरी या चपाती के साथ बहुत अच्छी लगती है।

 

 

लौकी चना दाल की सब्ज़ी 

लौकी चना दाल की सब्ज़ी में लौकी और चने की दाल का संयोजन होता है। चना दाल प्रोटीन प्रदान करती है, जबकि लौकी इस सब्ज़ी को हल्का और सुपाच्य बनाती है। इसमें स्वाद और बनावट को संतुलित करने के लिए हल्के मसालों का प्रयोग किया जाता है। यह सब्ज़ी पौष्टिक होने के साथ पेट भरने वाली भी होती है, लेकिन भारी नहीं लगती। यह रोज़मर्रा के भोजन के लिए उपयुक्त है। यह सब्ज़ी नरम रोटियों या सादे चावल के साथ स्वादिष्ट लगती है।

 

 

अरबी की सब्ज़ी 

अरबी की सब्ज़ी उत्तर प्रदेश की एक पारंपरिक तैयारी है, जिसे अरबी से बनाया जाता है। अरबी को पहले उबालकर फिर हल्का सा भूनकर मसाले डाले जाते हैं, जिससे चिपचिपापन न आए। इस सब्ज़ी की बाहरी परत हल्की कुरकुरी और अंदर से नरम होती है। इसका स्वाद हल्का मसालेदार लेकिन संतुलित होता है। अरबी की सब्ज़ी अक्सर व्रत या सात्विक भोजन में बनाई जाती है। यह चपाती या पूरी के साथ अच्छी लगती है।

 

 

टिंडा की सब्ज़ी 

टिंडा की सब्ज़ी उत्तर प्रदेश के घरों में बनाई जाने वाली एक सरल और हल्की सब्ज़ी है। कोमल टिंडों को टमाटर और हल्के मसालों के साथ पकाया जाता है। इस सब्ज़ी की बनावट नरम और स्वाद सौम्य होता है। यह आसानी से पच जाती है और सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त है। यह सब्ज़ी नियमित भोजन के लिए आम तौर पर बनाई जाती है। टिंडा की सब्ज़ी रोटी या सादे चावल के साथ सबसे अच्छी लगती है।

 

 

उत्तर प्रदेश की दाल और कढ़ी की किस्में  Uttar Pradesh Dal & Kadhi Varieties

उत्तर प्रदेश की दाल और कढ़ी रोज़मर्रा के शाकाहारी भोजन की रीढ़ हैं। ये व्यंजन स्थानीय दालों, बेसन और साधारण मसालों से बनाए जाते हैं, जिससे प्राकृतिक स्वाद बना रहता है। मूंग दाल, मिक्स दाल और पंचकुटी दाल पोषण और स्वाद दोनों में संतुलित होती हैं। कढ़ी दही और बेसन से बनती है और भोजन में हल्का खट्टापन जोड़ती है। धीमी आँच पर पकाना और पारंपरिक तड़का इनका मुख्य आधार है। ये व्यंजन चावल या चपाती के साथ बेहद अच्छे लगते हैं।

 

पंचकुटी दाल (पंचरत्न दाल)

पंचकुटी दाल पाँच अलग-अलग दालों से बनाई जाने वाली पौष्टिक दाल है। प्रत्येक दाल अपना अलग स्वाद और बनावट देती है। इन्हें धीमी आँच पर पकाकर हल्के मसालों से तड़का लगाया जाता है। यह दाल प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। संतुलित भोजन के लिए यह आदर्श है। इसे चावल या सादी चपाती के साथ परोसा जाता है।

 

 

मिक्स दाल

मिक्स दाल रोज़मर्रा की आरामदायक दाल है, जिसमें दो या अधिक दालों का उपयोग होता है। इनका संयोजन संतुलित और हल्का स्वाद देता है। हल्के मसाले और साधारण तड़का इसे पचने में आसान बनाते हैं। यह दाल उत्तर प्रदेश के घरों में आम भोजन है। इसे दोपहर या रात के खाने में परोसा जाता है। गरम चावल या नरम रोटियों के साथ यह सबसे अच्छी लगती है।

 

 

दाल तड़का

दाल तड़का एक प्रसिद्ध भारतीय दाल है, जो अपने सुगंधित तड़के के लिए जानी जाती है। इसमें पकी हुई पीली दाल पर घी, जीरा, लहसुन और मसालों का तड़का लगाया जाता है। यह तड़का दाल को गहराई और खुशबू देता है। यह व्यंजन सादगी और स्वाद का बेहतरीन संतुलन है। दाल तड़का जीरा चावल या फुल्कों के साथ परोसी जाती है।

 

 

उत्तर प्रदेश की मिठाइयाँ Uttar Pradesh Sweets

उत्तर प्रदेश की मिठाइयाँ अपनी समृद्ध बनावट, पारंपरिक विधियों और दूध, खोया, घी व चीनी के भरपूर उपयोग के लिए जानी जाती हैं। यहाँ की मिठाई परंपरा मंदिरों, त्योहारों और शाही रसोइयों से प्रभावित रही है। कई मिठाइयाँ धीमी आँच पर पकाई जाती हैं और हाथ से आकार दी जाती हैं। मथुरा, वाराणसी और लखनऊ दूध आधारित मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये मिठाइयाँ त्योहारों, शादियों और धार्मिक अवसरों पर बनाई जाती हैं। तरला दलाल वेबसाइट पर इनकी प्रामाणिक रेसिपीज़ उपलब्ध हैं।

 

जलेबी

जलेबी एक लोकप्रिय भारतीय मिठाई है, जो अपनी कुरकुरी बनावट और चाशनी से भरे स्वाद के लिए जानी जाती है। इसे खमीर उठे घोल से गोल-घुमावदार आकार में तलकर गरम चाशनी में डुबोया जाता है। जलेबी का रंग सुनहरा और स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है। यह त्योहारों, विशेष अवसरों और नाश्ते में विशेष रूप से पसंद की जाती है। गरमागरम जलेबी का स्वाद सबसे अच्छा लगता है।

 

 

 पेड़ा

 पेड़ा उत्तर प्रदेश के मथुरा क्षेत्र की प्रसिद्ध दूध आधारित मिठाई है। इसे खोया, चीनी और इलायची से बनाया जाता है। मिश्रण को गाढ़ा और दानेदार होने तक पकाया जाता है। छोटे गोल आकार के पेड़े बनाए जाते हैं। इसका स्वाद और खुशबू अत्यंत समृद्ध होती है। यह धार्मिक अवसरों पर चढ़ावे के रूप में चढ़ाया जाता है।

 

 

मालपुआ

मालपुआ उत्तर प्रदेश की पारंपरिक तली हुई मिठाई है। इसे मैदा, दूध और चीनी से बनाया जाता है। इसमें सौंफ या इलायची से खुशबू दी जाती है। तले जाने के बाद इसे चाशनी में डुबोया जाता है। यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होता है। त्योहारों और व्रतों में इसे विशेष रूप से बनाया जाता है।

 

 

मावा जलेबी 

मावा जलेबी  पारंपरिक जलेबी का समृद्ध रूप है। इसमें खमीर की बजाय खोया का उपयोग किया जाता है। घोल को गोल घुमावदार आकार में तलकर चाशनी में डुबोया जाता है। इसका स्वाद गहरा और बनावट घनी होती है। यह खास अवसरों पर बनाई जाती है। खोया जलेबी गरमागरम सबसे अच्छी लगती है।

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

 

1. उत्तर प्रदेश के भोजन की विशेषता क्या है?
उत्तर प्रदेश का भोजन अपनी शाकाहारी परंपरा, संतुलित मसालों और अवध व देसी प्रभावों के लिए जाना जाता है।

 

2. क्या उत्तर प्रदेश का भोजन शाकाहारी है?
हाँ, हालाँकि कुछ क्षेत्रों में मांसाहारी व्यंजन भी मिलते हैं, लेकिन शाकाहारी भोजन अत्यंत प्रमुख है।

 

3. उत्तर प्रदेश के सामान्य नाश्ते कौन-से हैं?
आलू पूरी, कचौरी, मटर घुघनी और लिट्टी-चोखा प्रमुख नाश्ते हैं।

 

4. अवध ग्रेवी को खास क्या बनाता है?
धीमी पकाने की विधि, सुगंधित मसाले और मलाईदार बनावट।

 

5. उत्तर प्रदेश में दाल कैसे बनाई जाती है?
अक्सर एक से अधिक दालों को मिलाकर पारंपरिक तड़के के साथ।

 

6. इन व्यंजनों के साथ क्या परोसा जाता है?
रोटी, चावल, अचार और चटनी।

 

7. क्या ये रेसिपीज़ ऑनलाइन उपलब्ध हैं?
हाँ, ये सभी रेसिपीज़ तरला दलाल वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

 

 

निष्कर्ष Conclusion

उत्तर प्रदेश का भोजन विविध शाकाहारी व्यंजनों का सुंदर संगम है, जिसमें भरपूर नाश्ते, समृद्ध ग्रेवी और आरामदायक दालें शामिल हैं। इसकी पाक पहचान क्षेत्रीय विरासत और सादगी का संतुलन प्रस्तुत करती है। नाश्ते, सब्ज़ियाँ, दालें और शाही करी इसकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती हैं। तरला दलाल की प्रामाणिक रेसिपीज़ के माध्यम से, उत्तर प्रदेश की शाकाहारी पाक कला को घर पर आसानी से अपनाया जा सकता है।

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