मेनु

This category has been viewed 49478 times

विभिन्न व्यंजन >   भारतीय व्यंजन >   राजस्थानी भोजन रेसिपी | प्रामाणिक शाकाहारी व्यंजन >   राजस्थानी सब्ज़ी  

22 राजस्थानी सब्ज़ी रेसिपी

User Tarla Dalal  •  Updated : Jan 07, 2026
   

राजस्थानी सब्ज़ी राजस्थान की पारंपरिक पाक कला की जीवंत अभिव्यक्ति है, जो राज्य की शुष्क जलवायु, सीमित जल संसाधनों और साधन-संपन्न रसोई तकनीकों से आकार लेती है। ये सब्ज़ियाँ अपने तेज़ और गहरे स्वाद, लंबी शेल्फ लाइफ और सरल सामग्रियों के बुद्धिमान उपयोग के लिए जानी जाती हैं। ताज़ी सब्ज़ियों पर अधिक निर्भर रहने के बजाय, राजस्थानी भोजन में बेसन, सूखी फलियाँ, दही आधारित ग्रेवी और मौसमी स्थानीय सब्ज़ियों का रचनात्मक उपयोग किया जाता है।

  
पीतल के बर्तन में परोसी गई राजस्थानी सब्ज़ी, गाढ़ी पीली-नारंगी ग्रेवी और पकौड़ी जैसे टुकड़ों के साथ, ऊपर धनिया से सजी हुई, साथ में रोटी और पारंपरिक साइड डिश, तथा तस्वीर पर “Rajasthani Sabzi Recipes” लिखा हुआ दिखाई देता है।
Rajasthani Sabzi - Read in English
રાજસ્થાની શાક ની રેસીપી - ગુજરાતી માં વાંચો (Rajasthani Sabzi in Gujarati)

राजस्थानी पकवानों की एक प्रमुख विशेषता सूखी और अर्ध-सूखी सब्ज़ियों की परंपरा है, जहाँ सब्ज़ियों और गट्टों को धीमी आँच पर मसालों के साथ पकाया जाता है। गट्टे आधारित सब्ज़ियाँ यह दर्शाती हैं कि कैसे बेसन के गट्टे पूरे व्यंजन का केंद्र बन जाते हैं। वहीं दही वाली सब्ज़ियाँ मसालों की तीखापन को संतुलित कर भोजन को आरामदायक बनाती हैं।

 

राजस्थानी सब्ज़ी में प्याज़-लहसुन रहित व्यंजन भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, जो सात्त्विक परंपराओं का पालन करते हैं और व्रत या जैन भोजन के लिए उपयुक्त होते हैं। ग्वारफली, कद्दू, टिंडा और हरी लहसुन जैसी मौसमी सब्ज़ियों को इस तरह पकाया जाता है कि उनका प्राकृतिक स्वाद बना रहे। कुल मिलाकर, राजस्थानी सब्ज़ी व्यावहारिक, पौष्टिक और अत्यंत स्वादिष्ट भोजन शैली को दर्शाती है।

 

 

पारंपरिक सूखी राजस्थानी सब्ज़ी (सूखी सब्ज़ी) Traditional Dry Rajasthani Sabzi (Sukhi Sabzi)

पारंपरिक सूखी राजस्थानी सब्ज़ियाँ राज्य की शुष्क जलवायु और संसाधनपूर्ण जीवनशैली को दर्शाती हैं। इनमें बहुत कम पानी का उपयोग किया जाता है और स्वाद मसालों व धीमी पकाने की विधि से विकसित किया जाता है। ये सब्ज़ियाँ सुगंधित, 

टिकाऊ और यात्रा या त्योहारों के लिए उपयुक्त होती हैं। इन्हें बाजरे की रोटी, ज्वार की रोटी या सादी चपाती के साथ परोसा जाता है। मसाले तीखे लेकिन संतुलित होते हैं। ये रोज़मर्रा के मारवाड़ी भोजन का प्रतिनिधित्व करती हैं।

 

केर सांगरी की सब्ज़ी
केर सांगरी राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध सूखी सब्ज़ियों में से एक है। 

इसमें सूखी केर बेरी और सांगरी को पारंपरिक मसालों के साथ पकाया जाता है। 

इसका स्वाद हल्का खट्टा और मिट्टी जैसा होता है। यह कम पानी में पकाई जाती है जिससे स्वाद गाढ़ा रहता है। यह विवाह और विशेष अवसरों पर परोसी जाती है।

 

टिंडा की सब्ज़ी
टिंडा की सब्ज़ी गोल लौकी से बनी सरल लेकिन स्वादिष्ट डिश है। 

धीमी आँच पर पकने से सब्ज़ी मसालों को अच्छी तरह सोख लेती है। इसका स्वाद हल्का मीठा और संतुलित होता है।

 यह हल्की और सुपाच्य होती है। रोटी या दाल-चावल के साथ अच्छी लगती है।

 

ग्वारफली की सूखी सब्ज़ी
इस सब्ज़ी में ग्वारफली को मसालों के साथ पकाया जाता है। 

ग्वारफली का हल्का कड़वापन मसालों के साथ अच्छा लगता है। यह फाइबर से भरपूर होती है। रोज़मर्रा के भोजन के लिए उपयुक्त है। 

सूखी होने के कारण यह लंबे समय तक टिकती है।

 

मूली की सब्ज़ी
मूली की सब्ज़ी मूली और उसके पत्तों से बनाई जाती है। 

पकाने पर मूली की तीखापन कम हो जाती है। इसका स्वाद हल्का मसालेदार और मिट्टी जैसा होता है। 

यह सर्दियों की पौष्टिक सब्ज़ी है। साधारण मसालों में बनाई जाती है।

 

 

कद्दू की सब्ज़ी 

कद्दू की सब्ज़ी कद्दू की प्राकृतिक मिठास को उजागर करती है। मसाले इसमें गरमाहट और गहराई जोड़ते हैं। 

यह हल्की होने के साथ-साथ पेट भरने वाली होती है। यह रोज़मर्रा के भोजन में आमतौर पर बनाई जाती है। 

रोटी के साथ परोसने पर इसका स्वाद सबसे अच्छा लगता है।

 

 

गट्टे आधारित राजस्थानी सब्ज़ी Gatte-Based Rajasthani Sabzi

गट्टे आधारित सब्ज़ियाँ राजस्थानी भोजन की पहचान हैं। ये बेसन से बने गट्टों से तैयार होती हैं और ताज़ी सब्ज़ियों पर निर्भर नहीं होतीं। 

गट्टे मसालों को अच्छी तरह सोख लेते हैं। ये सब्ज़ियाँ किफायती, स्वादिष्ट और व्यावहारिक होती हैं। इन्हें रोज़ाना और त्योहारों दोनों में बनाया जाता है। 

यह राजस्थान की रचनात्मक रसोई कला को दर्शाती हैं।

 

 

गट्टे की सब्ज़ी
गट्टे की सब्ज़ी सबसे प्रसिद्ध राजस्थानी व्यंजन है। 

इसमें नरम बेसन के गट्टे मसालेदार ग्रेवी या सूखी शैली में पकाए जाते हैं। 

इसका टेक्सचर नरम और हल्का चबाने योग्य होता है। यह पेट भरने वाली और आरामदायक डिश है। 

रोटी या चावल के साथ परोसी जाती है।

 

 

पापड़ मांगोड़ी की सब्ज़ी
इस सब्ज़ी में सूखी बेसन की मांगोड़ी का उपयोग होता है। पकने पर ये मसालों को सोख लेती हैं।

 इसका स्वाद अलग और तेज़ होता है। अक्सर बिना प्याज़-लहसुन के बनाई जाती है। यह टिकाऊ और भारी भोजन है।

 

 

ग्वार गट्टा सब्ज़ी
इसमें ग्वारफली और गट्टों का संयोजन होता है। 

बनावट और स्वाद में संतुलन आता है। यह हल्की तीखी और मिट्टी जैसे स्वाद वाली होती है। 

सूखी या अर्ध-सूखी बनाई जाती है। पारंपरिक भोजन के लिए उपयुक्त है।

 

 

गट्टे की कढ़ी 

गट्टे की कढ़ी एक पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन है, जिसमें बेसन के नरम गट्टों को खट्टे दही की कढ़ी में पकाया जाता है। 

इसकी बनावट मलाईदार और स्वाद संतुलित होता है। गट्टे मसालों का स्वाद अच्छी तरह सोख लेते हैं, जिससे कढ़ी स्वादिष्ट बनती है। 

यह आमतौर पर चावल या रोटी के साथ परोसी जाती है। त्योहारों और पारिवारिक भोजन में यह विशेष रूप से पसंद की जाती है।

 

 

 

दही आधारित (दहीवाली) राजस्थानी सब्ज़ी Yogurt-Based (Dahiwali) Rajasthani Sabzi

दही आधारित सब्ज़ियाँ राजस्थानी भोजन में खट्टापन और संतुलन लाती हैं। 

ये मसालों की तीखापन को नरम करती हैं। दही गाढ़ापन और स्वाद दोनों देता है। ये सब्ज़ियाँ भारी ग्रेवी से हल्की होती हैं। 

अक्सर दोपहर के भोजन में बनाई जाती हैं। रोटी या चावल के साथ अच्छी लगती हैं।

 

दही भिंडी
भिंडी को मसालेदार दही में पकाया जाता है। 

दही भिंडी की चिपचिपाहट कम करता है। इसका स्वाद हल्का और संतुलित होता है। 

यह पौष्टिक और हल्की होती है। रोज़मर्रा के भोजन के लिए उपयुक्त है।

 

दही आलू
आलू को दही की ग्रेवी में पकाया जाता है। 

आलू दही का स्वाद अच्छी तरह सोख लेते हैं। यह आरामदायक और जल्दी बनने वाली सब्ज़ी है।

व्रत के दिनों में भी बनाई जाती है।

 

दही चने की सब्ज़ी
काले चनों को दही में पकाया जाता है। यह प्रोटीन से भरपूर होती है। 

इसका स्वाद हल्का खट्टा और मसालेदार होता है। यह संतोषजनक भोजन है। 

रोटी के साथ अच्छी लगती है।

 

 

दहीवाली रोटी 

दहीवाली रोटी एक सरल और सुकून देने वाली भारतीय डिश है, जिसमें नरम रोटियों को हल्के मसालेदार दही में भिगोया जाता है। 

इसका स्वाद हल्का और ताज़गी भरा होता है, जिससे यह आसानी से पच जाती है। 

यह व्यंजन हल्के भोजन या नाश्ते के रूप में पसंद किया जाता है। गर्म मौसम और व्रत के दिनों में यह विशेष रूप से उपयुक्त होती है। 

दहीवाली रोटी आमतौर पर ताज़ा और कम मसालों के साथ परोसी जाती है।

 

 

खट्टा गोभी

खट्टा गोभी एक पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन है, जिसे पत्तागोभी से खट्टे और हल्के मसालेदार स्वाद में तैयार किया जाता है। 

इसमें खट्टापन आमतौर पर दही या अमचूर से आता है, जो मसालों के स्वाद को संतुलित करता है। यह सब्ज़ी हल्की होने के साथ स्वादिष्ट भी होती है।

इसे रोज़मर्रा के भोजन के लिए आसानी से बनाया जा सकता है। रोटी या सादे चावल के साथ इसका स्वाद सबसे अच्छा लगता है।

 

 

जैन राजस्थानी सब्ज़ी रेसिपी Jain Rajasthani sabzi recipes

प्याज़-लहसुन रहित सब्ज़ियाँ राजस्थानी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। 

ये सात्त्विक सिद्धांतों पर आधारित होती हैं। स्वाद पूरी तरह मसालों से आता है। 

जैन भोजन और व्रत के लिए उपयुक्त होती हैं। सरल होते हुए भी स्वादिष्ट रहती हैं। पीढ़ियों से लोकप्रिय हैं।

 

खट्टा गोभी 

खट्टा गोभी एक पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन है, जिसे पत्तागोभी से खट्टे और हल्के मसालेदार स्वाद में तैयार किया जाता है। 

इसमें खट्टापन आमतौर पर दही या अमचूर से आता है, जो मसालों के स्वाद को संतुलित करता है। 

यह सब्ज़ी हल्की होने के साथ स्वादिष्ट भी होती है। इसे रोज़मर्रा के भोजन के लिए आसानी से बनाया जा सकता है। 

रोटी या सादे चावल के साथ इसका स्वाद सबसे अच्छा लगता है।

 

 

आलू और कद्दू की सब्ज़ी 

आलू और कद्दू की सब्ज़ी एक आरामदायक और घरेलू स्वाद वाली भारतीय डिश है। 

इसमें आलू और कद्दू को हल्के मसालों के साथ पकाया जाता है। कद्दू की प्राकृतिक मिठास आलू के स्वाद को संतुलित करती है। 

यह सब्ज़ी नरम बनावट वाली और सुपाच्य होती है। रोटी या सादे चावल के साथ यह बहुत अच्छी लगती है।

 

 

मेथी मांगोड़ी

मेथी मांगोड़ी एक पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन है, जिसमें सूखी बेसन की मांगोड़ी को ताज़ी मेथी के साथ पकाया जाता है। 

मेथी की हल्की कड़वाहट मसालों के साथ संतुलित हो जाती है। मांगोड़ी पकते समय मसालों का स्वाद अच्छी तरह सोख लेती हैं। 

यह सब्ज़ी आमतौर पर सूखी या अर्ध-सूखी बनाई जाती है। रोटी या बाजरे की रोटी के साथ यह बहुत स्वादिष्ट लगती है।

 

केर और किशमिश 

केर और किशमिश एक पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन है, जिसमें केर की खटास और किशमिश की प्राकृतिक मिठास का सुंदर मेल होता है। 

यह व्यंजन खट्टे, मीठे और मसालेदार स्वादों का संतुलन प्रस्तुत करता है। इसे आमतौर पर सूखी या अर्ध-सूखी सब्ज़ी के रूप में बनाया जाता है। 

विभिन्न बनावट इसे स्वादिष्ट और खास बनाती हैं। इसे रोटी के साथ या त्योहारी भोजन में परोसा जाता है।

 

वजन घटाने के लिए स्वस्थ राजस्थानी सब्ज़ी. Healthy Rajasthani sabzi for weight loss.

हल्की और पोषक होती है, जिसे कम तेल और पारंपरिक मसालों के साथ तैयार किया जाता है। इन सब्ज़ियों में मौसमी सब्ज़ियों का उपयोग किया जाता है, जिससे फाइबर और पोषण मिलता है। धीमी आँच पर पकाने से स्वाद बढ़ता है और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। लौकी, ग्वार, कद्दू और दही आधारित सब्ज़ियाँ पाचन के लिए लाभदायक होती हैं। ये सब्ज़ियाँ कम कैलोरी में पेट भरने वाली होती हैं। नियमित सेवन से वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

 

पंचमेल की सब्ज़ी
पंचमेल सब्ज़ी में पाँच प्रकार की सब्ज़ियाँ होती हैं। 

यह संतुलन और विविधता का प्रतीक है। हर सब्ज़ी अलग बनावट देती है। 

मसाले सभी स्वादों को जोड़ते हैं। यह पौष्टिक और रंगीन सब्ज़ी है।

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) FAQs

 

1. राजस्थानी सब्ज़ी अन्य भारतीय सब्ज़ियों से अलग क्यों है?
राजस्थानी सब्ज़ी सूखी या अर्ध-सूखी शैली, कम पानी और तीखे मसालों के कारण अलग होती है। यह राजस्थान की जलवायु के अनुसार विकसित हुई है। बेसन, दही और सूखी फलियों का उपयोग आम है। इसका स्वाद गहरा और टिकाऊ होता है।

 

2. क्या राजस्थानी सब्ज़ियाँ बहुत तीखी होती हैं?
अधिकतर सब्ज़ियाँ मध्यम से तीखी होती हैं, लेकिन दही और घी से संतुलित की जाती हैं। तीखापन स्वाद के अनुसार बदला जा सकता है। मसालों का उद्देश्य गहराई देना होता है।

 

3. राजस्थानी सब्ज़ी में बेसन का अधिक उपयोग क्यों होता है?
बेसन पौष्टिक, टिकाऊ और बहुउपयोगी होता है। यह सब्ज़ियों की कमी में अच्छा विकल्प है। गट्टे और ग्रेवी में इसका उपयोग होता है। यह प्रोटीन भी देता है।

 

4. क्या प्याज़-लहसुन रहित राजस्थानी सब्ज़ियाँ होती हैं?
हाँ, कई पारंपरिक सब्ज़ियाँ बिना प्याज़-लहसुन बनाई जाती हैं। ये जैन और व्रत भोजन के लिए उपयुक्त होती हैं। स्वाद मसालों और दही से आता है।

 

5. राजस्थानी सब्ज़ी में कौन सी सब्ज़ियाँ आम हैं?
ग्वारफली, कद्दू, टिंडा, मूली, आलू और हरी लहसुन आम हैं। मौसमी और स्थानीय सब्ज़ियों का उपयोग होता है।

 

6. क्या राजस्थानी सब्ज़ी स्वास्थ्य के लिए अच्छी है?
हाँ, पारंपरिक तरीके से बनी सब्ज़ियाँ प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती हैं। कम पानी में पकाने से पोषण बना रहता है। दही पाचन में सहायक होता है।

 

7. राजस्थानी सब्ज़ी के साथ कौन सी रोटी सबसे अच्छी होती है?
बाजरे की रोटी, ज्वार की रोटी, मिस्सी रोटी और सादी चपाती सबसे उपयुक्त हैं। कढ़ी वाली सब्ज़ियों के साथ चावल भी परोसे जाते हैं।

 

 

निष्कर्ष Conclusion

राजस्थानी सब्ज़ी राजस्थान की पाक परंपरा का सच्चा प्रतिबिंब है। सूखी और अर्ध-सूखी विधियाँ, तेज़ मसाले और कम पानी का उपयोग इसे विशेष बनाता है। बेसन, दही, मौसमी सब्ज़ियाँ और सूखी फलियाँ इसे पौष्टिक और व्यावहारिक बनाती हैं। गट्टे आधारित, दही वाली और प्याज़-लहसुन रहित सब्ज़ियाँ हर अवसर के लिए उपयुक्त हैं। स्वाद, पोषण और परंपरा का यह संतुलन राजस्थानी सब्ज़ी को भारतीय शाकाहारी भोजन का अनमोल हिस्सा बनाता है।

ads
user

Follow US

रेसिपी श्रेणियाँ